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सुपरटेक को कोर्ट से राहत, अभी नहीं गिरेंगे टावर

नई दिल्ली, सुप्रीम कोर्ट ने नोएडा में रियल एस्टेट कंपनी सुपरटेक के 40 मंजिला दो टावरों को गिराने के इलाहाबाद हाई कोर्ट के आदेश पर फिलहाल रोक लगा दी है। हाई कोर्ट के फैसले को चुनौती देने वाली कई याचिकाएं सुनवाई के लिए स्वीकार कर ली है। कोर्ट ने सुनवाई होने तक यथास्थिति बनाए रखने का आदेश दिया।

नोएडा के सेक्टर 93ए के दो अंडर-कंस्ट्रक्शन 40 मंजिला टावर गिराने के इलाहाबाद हाई कोर्ट के ऑर्डर को बिल्डर सुपरटेक, नोएडा अथॉरिटी और कई बायर्स ने सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी थी। कोर्ट ने इन याचिकाओं पर कई नोटिस भी जारी किए। कोर्ट ने सुनवाई पूरी होने तक सुपरटेक द्वारा किसी भी फ्लैट की बिक्री या ट्रांसफर पर रोक लगाई है। इसके साथ ही कोर्ट ने कहा है कि वह इमारत की ऊंचाई की जांच भी करेगा।

इन दो टॉवरों में 857 अपार्टमेन्ट हैं। इनमें से करीब 600 फ्लैट पहले ही बेचे जा चुके हैं। ये टॉवर सुपरटेक के एमेरल्ड कोर्ट परियोजना का हिस्सा हैं। सुपरटेक कंपनी ने अपनी याचिका में कहा था कि इन टावरों का निर्माण भवन के मंजूर नक्शे के अनुरूप किया गया है और इसमें किसी प्रकार के नियमों का उल्लंघन नहीं हुआ है। इलाहाबाद हाई कोर्ट ने 11 अप्रैल को इन दो टॉवरों को गिराने का आदेश देने के साथ ही कंपनी को फ्लैट खरीदने वालों को उनकी रकम लौटाने का निर्देश दिया था।
 

हाई कोर्ट ने एमेरल्ड कोर्ट ओनर्स रेजिडेन्ट वेलफेयर असोसिएशन की याचिका पर यह फैसला सुनाया था। असोसिएशन का आरोप था कि इन टावरों का निर्माण यूपी अपार्टमेन्ट कानून का उल्लंघन करके किया गया है। याचिकाकर्ता का दावा था कि नोएडा अथॉरिटी ने इन टावरों की ऊंचाई बढ़ाने की अनुमति दी थी। ये टावर पहले 24 मंजिल के बनने थे और इनके साथ वाले भवन ब्लॉक से 16 मीटर की दूरी अनिवार्य थी लेकिन इस मामले में ऐसा नहीं हुआ है और इस वजह से यह असुरक्षित है। इससे रोशनी तथा हवा भी बाधित हो रही है।

Source : नवभारत टाइम्स Date : Tuesday, May 06, 2014

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